my writings

Thursday, July 26, 2007

जीतना मुझको ही है विश्व तु बस देखना...............

देखता हूँ ऊपर वाले कब तक तु तड्पाएगा,
एक दिन तो तरस तुझको मुझ पर भी आएगा,
जिद्दी अगर तु है तो मैं भी कुछ कम नहीं,
कोशिश तु कितनी भी कर ले,होगी मेरी आँख नम नहीं,
देह पर अधिकार तेरा इसका चाहे कुछ भी कर ले,
मन मेरा है मेरे बस में तोड उसको कैसे पाएगा,
देखता हूँ कब तक तु मुझे मुशकिले दे पाएगा,
परिक्षाएं ले ले कर तु मेरी थक जाएगा,
हर इम्तहान में तु मुझको तैयार खड़ा पाएगा,
मुश्किलो में भी तु मुझे मुस्कराता पाएगा,
जितना तुझसे हो सके परिक्षाएं ले ले तु मेरी,
देखना ऎ विश्व एक दिन जीत मैं ही जाऊगां.............

2 Comments:

  • At 10:40 AM , Blogger niks said...

    I think in hindi.....
    "EK NIDAR KAVITA............."
    Matlab...."A fearless poetry....."
    Great work bhaiya....Keep it upp.......................

     
  • At 10:53 PM , Blogger Puneet Gupta said...

    Quite inspirational dear!!
    Infact, mujhe hamesha se hi inspire kar dene wali poems achhi lagti hain..

    Good work!

     

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