my writings

Wednesday, August 15, 2007

मुश्किलें......

मुश्किलें जीने का सहारा बन गई ,
जिस दिन जीवन की हक़ीक़त समझ आई मुझे,
सोचा ना तक्लीफ़े आई तो क्या जिन्दगी बिताई,
ना इम्तहान देने पडे जिन्दगी में तो,
अपने जीने का क्या मतलब रह जाएगा,
पूरा करने की कोशिश में इन इम्तहानो को,
कुछ ख्वाब बन ही जाया करते हें,
और कुछ ख्वाब अक्सर टूट जाया करते हें,
पर क्या ख्वाब टूटने से इन्सान भी टूट जाते हें,

मेरे खयाल मे नहीं................

खवाब टूटने से एक अनुभव जुडता हॆ,
जोश दोगुना करके फिर से एक नया खवाब,
ओर उसको पूरा करने की कोशिश की जाती हे,
फिर कुछ ख्वाब पूरे हो जाते हे.
कुछ फिर भी टूट जाते हें,
नही तो बिना मकसद ये जीवन किस का
जब हमें ना ये पता हम कहां से आते हें ,
और ना ये पता कि कहां जाते हें,
जिए जाते हें हम सब जिए जाते हें,
बस शायद इन्हि खवाबो को पूरा करने के लिए,
बस जिए जाते हें,हम जिए जाते हैं.................................

सचिन जैन

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