my writings

Thursday, May 08, 2008

बहुत पहले लिखी हुई लिनेस है ये..........:)

नशा भी जरूरी है जिंदगी में, होश की कीमत समझने को,
अदा भी जरूरी है जिंदगी में, कुछ यादें छोड़ जाने को,
वफ़ा भी जरूरी है जिंदगी में, किसी को चाहने को,
और एक बेवफा भी जरूरी है जिंदगी में, प्यार का अहसास जगाने को,
यारो इस्स्लिए ना वफ़ा दूंद्ताहूँ ना दिलरुबा दूंद्ता हूँ, मैं तो बस एक बेवफा दूंद्ता हूँ,

Friday, April 25, 2008

कभी कभी डर लगता है मुझे कुछ बातें सोचकर,

कभी कभी डर लगता है मुझे कुछ बातें सोचकर,
फिर लगता है डर कैसा जब कुछ सपने हैं और सब अपने है,
कभी सारा संसार सूना सूना सा लगने लगता है,
फिर कभी सारा जहाँ अपना सा लगने लगता है,
कभी उस ऊपर वाले से जिद का मन करता है,
फिर कभी सब कुछ भुलाकर उससे कुछ मांगने का मन करता है,
कभी लगता है कि मैं सब कुछ कर सकता हूँ,
फिर डर जाता हूँ कि ज्यादा तो नही सोच रहा हूँ मैं,
कभी अचानक मन टूट सा जाता है,
फिर कभी विश्वास सा आता है और बातें बना जाता हूँ :) ,
कभी भी हारने से डर नही लगता मुझको,
डर फिर भी लगता है ना जीत पाने का............

Monday, December 24, 2007

सफर एक नया शुरू हो पड़ा ह



सफर एक नया शुरू हो पड़ा है,
उम्मीदों उमंगो का नशा सा चढ़ा है,
थोड़ा सा अनुभव है, बहुत सारा जोश है,
थोड़ा-थोड़ा सा मुझको कुछ होश है,
सुन रहा हूँ मैं सबकी बातें सयानी,
करनी है फिर भी कुछ तो मनमानी,
सफर तो चलें हैं बहुत मैंने पहले,
मगर इस सफर मैं बहुत कुछ है पाना,
सिखाया है दुनिया ने जो कुछ भी मुझको,
उन सब बातों को यहाँ है आजमाना,
सपने बड़े हैं, आशा अधिक है,
कठनाइयों को है सारी अपनी भूल जाना,
यकीं ख़ुद पर बहुत है, विश्वास उस पर भी है,
है बुलंदियों के पार पहुँच के दुनिया को दिखाना,
इस सफर मैं मुश्किलें कितनी भी आएं,
जीत आखिरकार है मुझको एक दिन जाना.........
सफर एक नया शुरू हो पड़ा है,
उम्मीदों उमंगो का नशा सा चढ़ा है,
थोड़ा सा अनुभव है, बहुत सारा जोश है,
थोड़ा-थोड़ा सा मुझको कुछ होश है,
सुन रहा हूँ मैं सबकी बातें सयानी,
करनी है फिर भी कुछ तो मनमानी,
सफर तो चलें हैं बहुत मैंने पहले,
मगर इस सफर मैं बहुत कुछ है पाना,
सिखाया है दुनिया ने जो कुछ भी मुझको,
उन सब बातों को यहाँ है आजमाना,
सपने बड़े हैं, आशा अधिक है,
कठनाइयों को है सारी अपनी भूल जाना,
यकीं ख़ुद पर बहुत है, विश्वास उस पर भी है,
है बुलंदियों के पार पहुँच के दुनिया को दिखाना,
इस सफर मैं मुश्किलें कितनी भी आएं,
जीत आखिरकार है मुझको एक दिन जाना.........

जीतना मुझको ही है विश्व तू बस देखना........ I am so confident now a days that it is not easy to beleive on my talks..................but let me assure the world..............I will make eveything happened................ you people just watch the show........

Friday, October 05, 2007

जीवन का भंवर........


फ़ंस से गए हैं,जीवन के इस भंवर में हम कितना,
ना रहना चाहे इसमे, ना ही चाहे इससे निकलना,
अगर रहना चाहे इसमे, तो पड़े जीवन के थपेड़े यहाँ,
अगर निकलना चाहे,तो है मजबूरियों का समंदर,
सामने खड़ी हैं, जिम्मेदारियां घड़ियाल की तरह,
बेबसी ऎसी, कि पहचान मिट रही है खुद के वजूद की,
रहना ही पसंद, क्योंकि निकलकर तो ड़र है डूब जाने का,
जीवन तो है, भवंर में जीने का भ्रम तो बना ही हुआ है,
अलग कुछ नहीं चाहे हम, बने हुए ही रास्तो पर चलना पसंद हमें,
ना बनाते कभी,नया रास्ता जिस पर दुनिया चलना चाहे,
नहीं सोचते हम कभी, कुछ प्रयास ही तो बनाते हैं वजूद को,
नहीं कोशिश करते, कभी हम भवंर से निकलने की,
निकलकर डूब भी गए तो क्या, जब एक दिन ड़ूबना है ही,
अलग पहचान रह जाएगी, भवंर से भी निकल पायेंगे हम,
ढोयेंगे नहीं फ़िर, जियेगें हम इस जीवन को…………………


सचिन जैन

Saturday, September 15, 2007

अनुभव जिन्दगी की बारीकियों का,...


अनुभव जिन्दगी की बारीकियों का,
अक्सर परेशानियों में हुआ करता है,
जैसे बचपन के दिनो का मजा,
नादानियों में हुआ करता है,

परेशानियों में जब अपनो की जरूरत आती है,
अक्सर आजमाईश हो ही जाया करती है,
इस दौर में कई बार ऎसा होता है,
कि गलतफ़हमियां टूट जाया करती है,

समय भी अक्सर अपने गुल दिखाता है,
कभी मजमा लगाता है, कभी मातम सुनाता है,
रास्ते बदलकर लोग जिन गलियों से निकले थे कभी,
अब वो उन गलियों से बचने को वे अपने रास्ते बदलते हैं

पूरा सा लगता ख्वाब जब टूट जाता है,
अक्सर नींद आँखो से उडं जााती है,
हंसने का बहाना मिल जाता है दुनिया को,
मुसकराकर कोई जब अपने गम छिपाता है,

जब दिमाग झटक देता है दिल की बातो को,
अक्सर दिल में कई सवाल उठ जाया करते हैं,
जब जिन्दगी टूट कर बिखर सी जाती है,
अक्सर जज्बात सिमट ही जाया करते हैं.....


सचिन जैन

Wednesday, August 15, 2007

मुश्किलें......

मुश्किलें जीने का सहारा बन गई ,
जिस दिन जीवन की हक़ीक़त समझ आई मुझे,
सोचा ना तक्लीफ़े आई तो क्या जिन्दगी बिताई,
ना इम्तहान देने पडे जिन्दगी में तो,
अपने जीने का क्या मतलब रह जाएगा,
पूरा करने की कोशिश में इन इम्तहानो को,
कुछ ख्वाब बन ही जाया करते हें,
और कुछ ख्वाब अक्सर टूट जाया करते हें,
पर क्या ख्वाब टूटने से इन्सान भी टूट जाते हें,

मेरे खयाल मे नहीं................

खवाब टूटने से एक अनुभव जुडता हॆ,
जोश दोगुना करके फिर से एक नया खवाब,
ओर उसको पूरा करने की कोशिश की जाती हे,
फिर कुछ ख्वाब पूरे हो जाते हे.
कुछ फिर भी टूट जाते हें,
नही तो बिना मकसद ये जीवन किस का
जब हमें ना ये पता हम कहां से आते हें ,
और ना ये पता कि कहां जाते हें,
जिए जाते हें हम सब जिए जाते हें,
बस शायद इन्हि खवाबो को पूरा करने के लिए,
बस जिए जाते हें,हम जिए जाते हैं.................................

सचिन जैन

Thursday, July 26, 2007

जीतना मुझको ही है विश्व तु बस देखना...............

देखता हूँ ऊपर वाले कब तक तु तड्पाएगा,
एक दिन तो तरस तुझको मुझ पर भी आएगा,
जिद्दी अगर तु है तो मैं भी कुछ कम नहीं,
कोशिश तु कितनी भी कर ले,होगी मेरी आँख नम नहीं,
देह पर अधिकार तेरा इसका चाहे कुछ भी कर ले,
मन मेरा है मेरे बस में तोड उसको कैसे पाएगा,
देखता हूँ कब तक तु मुझे मुशकिले दे पाएगा,
परिक्षाएं ले ले कर तु मेरी थक जाएगा,
हर इम्तहान में तु मुझको तैयार खड़ा पाएगा,
मुश्किलो में भी तु मुझे मुस्कराता पाएगा,
जितना तुझसे हो सके परिक्षाएं ले ले तु मेरी,
देखना ऎ विश्व एक दिन जीत मैं ही जाऊगां.............