जीवन के इस सफ़र में एक नई सी डगर है,
नई सी एक मंजिल है, नया सा कुछ अहसास है,
हर वक़्त मुझे अब तो चाहत का है नशा सा,
कुछ हूँ मैं खोया सा कुछ हूँ मैं बहका सा,
बन रही है नई आशाएं और एक विश्वास भी है,
मंजिल मिल ही जाएंगी ये एक अहसास भी है....:)
Monday, October 31, 2011
Saturday, October 01, 2011
विरोध कुछ नया करने की प्रेरणा दे जाता है
विरोध कुछ नया करने की प्रेरणा दे जाता है
जिस तरह घर्षण से ही गाडी चल पाती है,
ना अनुभव ना श्रेष्टता ना भाषा इससमे काम आए,
मन में हिया अगर विचार अच्छे तभी कविता कोई लिख पाए,
ना छोटा ना कोई बड़ा सभी एक सामान पाए,
दर्द दूसरों का मससूस हो तभी कविता बन पाए,
जिस तरह घर्षण से ही गाडी चल पाती है,
ना अनुभव ना श्रेष्टता ना भाषा इससमे काम आए,
मन में हिया अगर विचार अच्छे तभी कविता कोई लिख पाए,
ना छोटा ना कोई बड़ा सभी एक सामान पाए,
दर्द दूसरों का मससूस हो तभी कविता बन पाए,
Friday, July 29, 2011
आते जाते राहो में, दिल्लगी की बाहों में,
आते जाते राहों में, दिल्लगी की बाहों में
हमको ये ख्याल आता है, क्या इन जिंदगी की राहों में हमको भी कोई अजनबी मिलेगा
सोचते है हम कोई तो मिलेगा राहों में,पहला प्यारा होगा पहला नशा होगा,
पहली बार होंगे हम किसी की बाहों में,
कोई तो कहेगा हमें अपना, हम भी होंगे किसी का सपना,
कोई तो होगा जिसे होगा हमारा ख्याल, कोई तो पूछेगा हमसे ये सवाल " कहो ना प्यार है",
बस अब उसी का है हमको इंतजार, उस्सी के लिए है दिल बेकरार,
सोचता हूँ सोचते कट ना जाए, ये दिन, ये रात और ये रास्ते,
ना रह जाए मेरी सोच सिर्फ एक सपना,
यही सोच के दिल डरता है,
पर कहीं ना कहीं इस दिल को है यकीं ,
कहीं ना कहीं तो कोई होगा , जो देख रहा होगा हमारा सपना....
10 -03 -2002
सचिन जैन
आते जाते राहो में, दिल्लगी की बाहों में,
हमको ये ख्याल आया है,
इन जिंदगी की राहो में हमने भी एक अजनबी को पाया है,
सोच रहे है, पहला प्यार है, पहला नशा है, पहला गजब का ये अहसास है,
कोई कह रहा है हमें अपना, हम भी है किसी का सपना,
कोई है जिससे है हमारा ख्याल, जो पूछता है हमसे सवाल "कहो ना प्यार है"
उसी का ही था हमको बरसों से इंतज़ार, उसी के लिए था दिल बेकरार,
कट तो गए बहुत दिन, बहुत रात और बहुत रास्ते,
पर अब सपना सच होता लगता है, कोई अपना होता लगता है.........:)
30 -07 -2011
सचिन जैन
हमको ये ख्याल आता है, क्या इन जिंदगी की राहों में हमको भी कोई अजनबी मिलेगा
सोचते है हम कोई तो मिलेगा राहों में,पहला प्यारा होगा पहला नशा होगा,
पहली बार होंगे हम किसी की बाहों में,
कोई तो कहेगा हमें अपना, हम भी होंगे किसी का सपना,
कोई तो होगा जिसे होगा हमारा ख्याल, कोई तो पूछेगा हमसे ये सवाल " कहो ना प्यार है",
बस अब उसी का है हमको इंतजार, उस्सी के लिए है दिल बेकरार,
सोचता हूँ सोचते कट ना जाए, ये दिन, ये रात और ये रास्ते,
ना रह जाए मेरी सोच सिर्फ एक सपना,
यही सोच के दिल डरता है,
पर कहीं ना कहीं इस दिल को है यकीं ,
कहीं ना कहीं तो कोई होगा , जो देख रहा होगा हमारा सपना....
10 -03 -2002
सचिन जैन
आते जाते राहो में, दिल्लगी की बाहों में,
हमको ये ख्याल आया है,
इन जिंदगी की राहो में हमने भी एक अजनबी को पाया है,
सोच रहे है, पहला प्यार है, पहला नशा है, पहला गजब का ये अहसास है,
कोई कह रहा है हमें अपना, हम भी है किसी का सपना,
कोई है जिससे है हमारा ख्याल, जो पूछता है हमसे सवाल "कहो ना प्यार है"
उसी का ही था हमको बरसों से इंतज़ार, उसी के लिए था दिल बेकरार,
कट तो गए बहुत दिन, बहुत रात और बहुत रास्ते,
पर अब सपना सच होता लगता है, कोई अपना होता लगता है.........:)
30 -07 -2011
सचिन जैन
Friday, July 22, 2011
वो हमसे पूछे क्यों नहीं तुम कुछ कहते, हम उनसे पूछे तुम तो कुछ कहते,
वो हमसे पूछे क्यों नहीं तुम कुछ कहते, हम उनसे पूछे तुम तो कुछ कहते,
बस ऐसे ही चलती रहती अपनी बातें,कट जाती है ऐसे ही अपनी तो प्यारी रातें,
कुछ बताओ, कभी तुम कुछ बताओ, यही हम दोनों करते,
तुम कुछ पूछ लो, तुम कुछ पूछ लो कभी यह हम करते रहते,
ना वो पूछे ना हम पूछे, ना वो बताते ना हम बतातें,
दोनों ही इतराते जाते और मन ही मन हम मुस्काते जाते,
वो हमसे पूछे क्यों नहीं तुम कुछ कहते, हम उनसे पूछे तुम तो कुछ कहते,
कभी हम पूछे क्या करते हो दिन भर, कभी ये पूछे खाना खाया,
कभी पूछे घर में सब कैसे, कभी पूछे दूसरों की खबरें,
कभी हम पूछे कुछ तो लिखो, कभी वो पूछे कुछ तो पढ़ाओ,
लिखने पड़ने में रह जाते, बस यूँ ही हम बात करते जाते,
वो हमसे पूछे क्यों नहीं तुम कुछ कहते, हम उनसे पूछे तुम तो कुछ कहते,
लगता है की क्या बातें करे कभी, फिर भी हम करते जाते,
रोज ना जाने क्या क्या बातें करते, रुकते जाते करते जाते,
मुस्काते है, इठलाते है, बात करते करते कभी कभी रुक जाते है,
पर सच कहता हूँ मैं तो की, मन तो बस बाते करने को ही करता जाता है,
वो हमसे पूछ क्यों नहीं तुम कुछ कहते, हम उनसे पूछे तुम तो कुछ कहते,
कभी वो अपनी सुनती जाती, और मैं बस सुनता चला जाता,
कभी मैं अपनी कुछ सुनाता हूँ , और वो बस सुनती चली जाती,
ऐसे ही कट जाती रातें, हो जाती कितनी ही बातें,
बातें तो बस चलती जाती, दूरियां सब मिटती जाती,
वो हमसे पूछ क्यों नहीं तुम कुछ कहते, हम उनसे पूछे तुम तो कुछ कहते,
बस ऐसे ही चलती रहती अपनी बातें,कट जाती है ऐसे ही अपनी तो प्यारी रातें,
कुछ बताओ, कभी तुम कुछ बताओ, यही हम दोनों करते,
तुम कुछ पूछ लो, तुम कुछ पूछ लो कभी यह हम करते रहते,
ना वो पूछे ना हम पूछे, ना वो बताते ना हम बतातें,
दोनों ही इतराते जाते और मन ही मन हम मुस्काते जाते,
वो हमसे पूछे क्यों नहीं तुम कुछ कहते, हम उनसे पूछे तुम तो कुछ कहते,
कभी हम पूछे क्या करते हो दिन भर, कभी ये पूछे खाना खाया,
कभी पूछे घर में सब कैसे, कभी पूछे दूसरों की खबरें,
कभी हम पूछे कुछ तो लिखो, कभी वो पूछे कुछ तो पढ़ाओ,
लिखने पड़ने में रह जाते, बस यूँ ही हम बात करते जाते,
वो हमसे पूछे क्यों नहीं तुम कुछ कहते, हम उनसे पूछे तुम तो कुछ कहते,
लगता है की क्या बातें करे कभी, फिर भी हम करते जाते,
रोज ना जाने क्या क्या बातें करते, रुकते जाते करते जाते,
मुस्काते है, इठलाते है, बात करते करते कभी कभी रुक जाते है,
पर सच कहता हूँ मैं तो की, मन तो बस बाते करने को ही करता जाता है,
वो हमसे पूछ क्यों नहीं तुम कुछ कहते, हम उनसे पूछे तुम तो कुछ कहते,
कभी वो अपनी सुनती जाती, और मैं बस सुनता चला जाता,
कभी मैं अपनी कुछ सुनाता हूँ , और वो बस सुनती चली जाती,
ऐसे ही कट जाती रातें, हो जाती कितनी ही बातें,
बातें तो बस चलती जाती, दूरियां सब मिटती जाती,
वो हमसे पूछ क्यों नहीं तुम कुछ कहते, हम उनसे पूछे तुम तो कुछ कहते,
Wednesday, July 20, 2011
जमाने में मोहब्बत वो किया करते है,
जिन्हें किसी अजनबी पर हो खुद से ज्यादा यकीन,
हमें तो खुद पर भी अभी यकी नहीं आया,
किसी अजनबी पर आना तो बहुत दूर की बात है...
10-03-2002
Sachin Jain
और दूसरे पर यकीन वो किया करते हैं,
जो मोहब्बत के रस्ते पर बिना कुछ सोचे चल दिया करते हैं,
मोहब्बत वो राह हैं जिसमें दिमाग का काम नहीं,
दिल से सोचो दोस्त यकीन होगा उस अजनबी इंसान तभी..
20-07-2011
Dr. Akansha Jain
हमें भी मोहब्बत अब हुई है किसी से,
दिल अपना भी किसी ने बहकाया है,
खुद पर यकीं करना शुरू ही किया था अभी-अभी मैंने,
अब किसी अजनबी पर खुद से ज्यादा यकीं आया है..
20-07-2011
Sachin Jain
जिन्हें किसी अजनबी पर हो खुद से ज्यादा यकीन,
हमें तो खुद पर भी अभी यकी नहीं आया,
किसी अजनबी पर आना तो बहुत दूर की बात है...
10-03-2002
Sachin Jain
और दूसरे पर यकीन वो किया करते हैं,
जो मोहब्बत के रस्ते पर बिना कुछ सोचे चल दिया करते हैं,
मोहब्बत वो राह हैं जिसमें दिमाग का काम नहीं,
दिल से सोचो दोस्त यकीन होगा उस अजनबी इंसान तभी..
20-07-2011
Dr. Akansha Jain
हमें भी मोहब्बत अब हुई है किसी से,
दिल अपना भी किसी ने बहकाया है,
खुद पर यकीं करना शुरू ही किया था अभी-अभी मैंने,
अब किसी अजनबी पर खुद से ज्यादा यकीं आया है..
20-07-2011
Sachin Jain
Tuesday, July 19, 2011
जब जब मैं इन हाथ की रेखाओं को देखता हूँ...
जब जब मैं इन हाथ की रेखाओं को देखता हूँ
इनमे तुम्हारा चेहरा नजर आता है
आड़ी तिरछी रेखाओं से एक सूरत बन सी जाती है
ये सूरत मुझको मेरे सपनो में भी आती है
लोग अक्सर तलाशते हैं तकदीर हाथ की रेखाओं मैं
मैं तो अपनी तकदीर यानी तुम्हे ही देखता हूँ बस
मुझे भी यकीन है रेखाओं में छुपी होती है takdeer
इससलिए बस इन्हें ही निहारता हूँ........बस इन्हें ही निहारता हूँ.....:)
सचिन जैन
इनमे तुम्हारा चेहरा नजर आता है
आड़ी तिरछी रेखाओं से एक सूरत बन सी जाती है
ये सूरत मुझको मेरे सपनो में भी आती है
लोग अक्सर तलाशते हैं तकदीर हाथ की रेखाओं मैं
मैं तो अपनी तकदीर यानी तुम्हे ही देखता हूँ बस
मुझे भी यकीन है रेखाओं में छुपी होती है takdeer
इससलिए बस इन्हें ही निहारता हूँ........बस इन्हें ही निहारता हूँ.....:)
सचिन जैन
Thursday, May 28, 2009
आसान होता है अक्सर शब्दों में उलझा देना
आसान होता है अक्सर शब्दों में उलझा देना,
शब्दों से अपने को बढ-चदकर दिखला जाना,
शब्दों की अहमयि़त को ना हर कोई समझ पाता,
खुद को समझाने को वो एक जंजाल सा बुनता जाता,
लिखने-बोलने को तो कुछ भी कहा जा सकता है,
सही मायनो में शब्द का अर्थ जीवन में अपनाकर आता........
SACHIN JAIN
शब्दों से अपने को बढ-चदकर दिखला जाना,
शब्दों की अहमयि़त को ना हर कोई समझ पाता,
खुद को समझाने को वो एक जंजाल सा बुनता जाता,
लिखने-बोलने को तो कुछ भी कहा जा सकता है,
सही मायनो में शब्द का अर्थ जीवन में अपनाकर आता........
SACHIN JAIN
Tuesday, March 17, 2009
बहार आएंगी मेरे जीवन में एक बार ,
बहार आएंगी मेरे जीवन में एक बार ,
ये दिल भी कभी बेकरार होगा ,
निगाह देख रही हे कबसे रास्ता ,
खत्म एक दिन इनका इन्तेजार होगा ,
गुल एक दिन खुलकर मुस्कराएँगे,
फिजा में समाया इंतना प्यार होगा,
होठ चाहकर भी कुछ ना बोल पाएँगे,
बस आँखों ही आँखों में बैटन का दौर होगा
सचिन जैन
ये दिल भी कभी बेकरार होगा ,
निगाह देख रही हे कबसे रास्ता ,
खत्म एक दिन इनका इन्तेजार होगा ,
गुल एक दिन खुलकर मुस्कराएँगे,
फिजा में समाया इंतना प्यार होगा,
होठ चाहकर भी कुछ ना बोल पाएँगे,
बस आँखों ही आँखों में बैटन का दौर होगा
सचिन जैन
Saturday, March 07, 2009
हर दिन नई बात..........
हर दिन नई बात,
हर शाम नए ख्यालात,
फिर एक नई रात और
फिर एक नया सपना,
हर रात एक नया सपना..
सचिन जैन
The image on the Right has been taken from http://www.deviantart.com/print/815907/?itemtypeids=
Wednesday, January 28, 2009
मुझको कहाँ ढूंढे रे बन्दे, मैं तो तेरे पास में
मुझको कहाँ ढूंढे रे बन्दे, मैं तो तेरे पास में
ना तीरथ में ना मूरत में, ना एकांत निवास में,
ना मंदिर में ना मस्जिद में, ना काबे कैलाश में,
में तो तेरे पास में बन्दे, में तो तेरे पास में,
बन्दा रे बन्दा रे..............
खोजी होए तुंरत मिल जाऊं, इक पल की तलाश में,
कहेत कबीर सुनो भाई साधो, मैं तो हूँ विश्वास में,
ओ बन्दा रे मैं तो तेरे पास में …
ना मैं जप में ना मैं टाप में, ना व्रत उपवास में,
ना मैं किर्या-कर्म में रहता, नाही जोग सन्यास में,
नाही प्राण में नहीं पिंड में,ना ब्रह्माण्ड आकाश में,
ना मैं प्रकृति प्रवर गुफा में, नाहीं स्वसन की साँस में,
बन्दा रे बन्दा रे
खोजी होए तुंरत मिल जाऊं, इक पल की तलाश में,
कहेत कबीर सुनो भाई साधो, मैं तो हूँ विश्वास में,
ओ बन्दा रे, मैं तो तेरे पास में .........
Though I do not like to post anything which I have not written...............but I can not resist myself of posting these lines.......these are the part of a song in a movie Raaz-The Mystery Continues............I always want to write something of that sort......so posting these...........
ना तीरथ में ना मूरत में, ना एकांत निवास में,
ना मंदिर में ना मस्जिद में, ना काबे कैलाश में,
में तो तेरे पास में बन्दे, में तो तेरे पास में,
बन्दा रे बन्दा रे..............
खोजी होए तुंरत मिल जाऊं, इक पल की तलाश में,
कहेत कबीर सुनो भाई साधो, मैं तो हूँ विश्वास में,
ओ बन्दा रे मैं तो तेरे पास में …
ना मैं जप में ना मैं टाप में, ना व्रत उपवास में,
ना मैं किर्या-कर्म में रहता, नाही जोग सन्यास में,
नाही प्राण में नहीं पिंड में,ना ब्रह्माण्ड आकाश में,
ना मैं प्रकृति प्रवर गुफा में, नाहीं स्वसन की साँस में,
बन्दा रे बन्दा रे
खोजी होए तुंरत मिल जाऊं, इक पल की तलाश में,
कहेत कबीर सुनो भाई साधो, मैं तो हूँ विश्वास में,
ओ बन्दा रे, मैं तो तेरे पास में .........
Though I do not like to post anything which I have not written...............but I can not resist myself of posting these lines.......these are the part of a song in a movie Raaz-The Mystery Continues............I always want to write something of that sort......so posting these...........
Tuesday, January 20, 2009
आया रे लोगो....ओबामा आया रे.....
आया रे लोगो....ओबामा आया रे.....
लाया रे लाया...उम्मीदों का सुनामी लाया रे...
भय का माहौल मिटाने को....
आया रे लोगो....ओबामा आया रे.....
दुनिया को जिन्होंने डराया,
अब उन पर संकट आया रे,
गोरों की दुनिया में लोगो एक काला छाया रे.....
आया रे लोगो....ओबामा आया रे.....
पश्चिम के व्यवसायीकरण दुनिया पर छाया है रे,
कोशिश से तू अपनी, पार अगर ले पाया रे,
दुनिया तुझको पूजेगी और बन जाएगा तू राजा रे,
आया रे लोगो....ओबामा आया रे.....
बरसों के कर्म तुम्हारे आसान नहीं है भुलाने रे,
राजा बनकर तुम लोगो ने दुनिया को रुलाया रे,
पूर्व से अब सूर्य उगेगा और राजा ना अब कोई रहेगा...
आया रे लोगो....ओबामा आया रे.....
Sachin Jain
पूर्व से अब सूर्य उगेगा..........this represents that now India will show the world the path of leadership but not as a king but all will be same and have equal opportunities.......:) hoping that there will be no 3rd world country........
I have taken some inspiration from the thoughts of Kannan, Please read at http://kannaswisdomorlackofit.blogspot.com/2009/01/blog-post.html
लाया रे लाया...उम्मीदों का सुनामी लाया रे...
भय का माहौल मिटाने को....
आया रे लोगो....ओबामा आया रे.....
दुनिया को जिन्होंने डराया,
अब उन पर संकट आया रे,
गोरों की दुनिया में लोगो एक काला छाया रे.....
आया रे लोगो....ओबामा आया रे.....
पश्चिम के व्यवसायीकरण दुनिया पर छाया है रे,
कोशिश से तू अपनी, पार अगर ले पाया रे,
दुनिया तुझको पूजेगी और बन जाएगा तू राजा रे,
आया रे लोगो....ओबामा आया रे.....
बरसों के कर्म तुम्हारे आसान नहीं है भुलाने रे,
राजा बनकर तुम लोगो ने दुनिया को रुलाया रे,
पूर्व से अब सूर्य उगेगा और राजा ना अब कोई रहेगा...
आया रे लोगो....ओबामा आया रे.....
Sachin Jain
पूर्व से अब सूर्य उगेगा..........this represents that now India will show the world the path of leadership but not as a king but all will be same and have equal opportunities.......:) hoping that there will be no 3rd world country........
I have taken some inspiration from the thoughts of Kannan, Please read at http://kannaswisdomorlackofit.blogspot.com/2009/01/blog-post.html
Wednesday, December 31, 2008
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है.....
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है,
नए सपने का फिर बुना जंजाल है, पुरानो सपनो का भी भंडार है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है....
सरकारों की वही चाल है, सबकी अपनी रोटी दाल है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है,
महंगाई की वही मार है, ना सबको यहाँ अब रोज़गार है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है,
जोश का भी कहाँ सवाल है, भय का चारो और हाल है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है,
ओबामा का हर जगह नाम है और जूतों का भी नया आयाम है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है,
दिल अब भी बेकरार है, शहनाई का इंतज़ार है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है,
करने अभी बहुत काम है, आराम का न नामोनिशान है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है,
कलम की भी शान बढ़ानी है, लोगो को कविताएँ पढ़वानी है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है.......
SACHIN JAIN
नए सपने का फिर बुना जंजाल है, पुरानो सपनो का भी भंडार है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है....
सरकारों की वही चाल है, सबकी अपनी रोटी दाल है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है,
महंगाई की वही मार है, ना सबको यहाँ अब रोज़गार है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है,
जोश का भी कहाँ सवाल है, भय का चारो और हाल है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है,
ओबामा का हर जगह नाम है और जूतों का भी नया आयाम है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है,
दिल अब भी बेकरार है, शहनाई का इंतज़ार है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है,
करने अभी बहुत काम है, आराम का न नामोनिशान है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है,
कलम की भी शान बढ़ानी है, लोगो को कविताएँ पढ़वानी है,
नया साल है लेकिन अपना वही हाल है.......
SACHIN JAIN
Thursday, December 25, 2008
हर दिन नई बात, हर शाम नए ख्यालात,
हर दिन नई बात, हर शाम नए ख्यालात, फिर एक नई रात और फिर एक नया सपना...............हर रात एक नया सपनाहर दिन नई बात, हर शाम नए ख्यालात, फिर एक नई रात और फिर एक नया सपना...............हर रात एक नया सपना
Thursday, November 13, 2008
दिल लगाकर लोग अक्सर पछताते हैं
दिल लगाकर लोग अक्सर पछताते हैं ,
जीवन में अक्सर वो दुःख पाते है ,
कभी डरते हैं जमाने से, कभी घबराते हैं बेवफाई से,
फिर भी जाने क्यों ये दिल लगते हैं,
हम तो सच कहते हैं तुमसे आज,
हम तो डरते है जमाने से भी, घबराते हैं बेवफाई से भी,
इससलिए तो उनको दूर से देखकर आते है,
नहीं कहते कभी उनसे की उन्हें दिलोजान से चाहते है,
बस कागज़ पर लिख कर दिल की बातों को चंचल मन बस में लाते है.................
जीवन में अक्सर वो दुःख पाते है ,
कभी डरते हैं जमाने से, कभी घबराते हैं बेवफाई से,
फिर भी जाने क्यों ये दिल लगते हैं,
हम तो सच कहते हैं तुमसे आज,
हम तो डरते है जमाने से भी, घबराते हैं बेवफाई से भी,
इससलिए तो उनको दूर से देखकर आते है,
नहीं कहते कभी उनसे की उन्हें दिलोजान से चाहते है,
बस कागज़ पर लिख कर दिल की बातों को चंचल मन बस में लाते है.................
Wednesday, October 22, 2008
सूरज तुम जलते रहना, सूरज तुम जलते रहना,
This is the very first few line of my writing, It was in September 2002.
सूरज तुम जलते रहना, सूरज तुम जलते रहना,
तुम्ही से जीवन, तुम्ही से तन मन,तुम्ही से धूप और ये छाँव,
दिन और ये रात तुमने बनाए, प्रक्रति की कैसी लालिमा दिखाई,
दिया तुमने हमको ये जीवन निराला, जो तुम पर है निर्भर मांगे तुम्हारा उजाला,
आखिर क्यों तुमको पड़ता है जलकर भी जीना, क्या आता नहीं कभी तुम्हे पसीना,
क्यों तुम्हे दूसरों के लिए तडपना, क्या कोई नहीं है तुम्हारी सुनने वाला,
या कोई अन्य ही है कारण, या ये जलता ही है अकारण,
इसी उधेड़बुन में मैं हो गया परेशान, पर जल्द ही मिल गया मुझे समाधान,
उसी रात सूरज मेरे सपने मैं आया, उसने मुझे ये समझाया,
अरे अपने लिए तो सबको है जीना, बहाए जो दूसरों के लिए पसीना,
जो आए दूसरों के सदा काम, वही है सचमुच महान,
यही सोच कर मैं जलता हूँ, इसलिए ही उजाला करता हूँ,
सूरज के ऐसे विचार सुनकर, मैं बैठ गया बिस्तर से उठकर,
मन मैं सूरज के लिए श्रधा के भाव जागे, हम मनुष्य कुछ भी नहीं सूरज के आगे,
हमे भी चाहिए कुछ ऐसे जीना, की किसी के काम आए अपना पसीना,
तभी हम सचे मनुष्य कहलाएंगे, अपना जीवन सफल कर जाएंगे....................
सूरज तुम जलते रहना, सूरज तुम जलते रहना,
तुम्ही से जीवन, तुम्ही से तन मन,तुम्ही से धूप और ये छाँव,
दिन और ये रात तुमने बनाए, प्रक्रति की कैसी लालिमा दिखाई,
दिया तुमने हमको ये जीवन निराला, जो तुम पर है निर्भर मांगे तुम्हारा उजाला,
आखिर क्यों तुमको पड़ता है जलकर भी जीना, क्या आता नहीं कभी तुम्हे पसीना,
क्यों तुम्हे दूसरों के लिए तडपना, क्या कोई नहीं है तुम्हारी सुनने वाला,
या कोई अन्य ही है कारण, या ये जलता ही है अकारण,
इसी उधेड़बुन में मैं हो गया परेशान, पर जल्द ही मिल गया मुझे समाधान,
उसी रात सूरज मेरे सपने मैं आया, उसने मुझे ये समझाया,
अरे अपने लिए तो सबको है जीना, बहाए जो दूसरों के लिए पसीना,
जो आए दूसरों के सदा काम, वही है सचमुच महान,
यही सोच कर मैं जलता हूँ, इसलिए ही उजाला करता हूँ,
सूरज के ऐसे विचार सुनकर, मैं बैठ गया बिस्तर से उठकर,
मन मैं सूरज के लिए श्रधा के भाव जागे, हम मनुष्य कुछ भी नहीं सूरज के आगे,
हमे भी चाहिए कुछ ऐसे जीना, की किसी के काम आए अपना पसीना,
तभी हम सचे मनुष्य कहलाएंगे, अपना जीवन सफल कर जाएंगे....................
Tuesday, October 21, 2008
समय का बीतना तो एक सत्य है

समय का बीतना तो एक सत्य है,
उस पर विचार का कोई औचित्य नही है,
विचार तो इस बात पर होना चाहिए कि,
बीते हुए समय ने हमें क्या दिया,
मीठे यादें, सुनहरे सपने, कुछ ज्ञान,कुछ विज्ञान,
अजनबी लोग, अनुभव,कुछ असफ़लताएं, कुछ सफ़लताएं,
और ऎसा बहुत कुछ जो इस जीवन के लिए जरूरी था..........
This image is provided by Madhur kashyap. See his other arts at http://physiologoius.deviantart.com.
Saturday, October 11, 2008
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं, मन की मैं करता ही जाऊं........
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं, मन की मैं करता ही जाऊं,
सर्वश्रेष्ठ हूँ मैं, हर पंथ (religion) को मैं सर्वश्रेष्ठ ही पाऊँ,
कभी मैं कृष्ण को अपना कहूं, कभी मैं राम का हो जाऊं,
कभी महावीर मुझे अपने लगे, कभी मैं बुद्ध की शरण में जाऊं,
देवी से मिन्नतें करू, साईं की भी कृपा मैं मांगू,
पैगम्बर पर भी मथ्था टेकू, इशु को भी गले लगा लूं,
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं, मन की मैं करता ही जाऊं,
कभी मैं देखो मंदिर जाऊं, कभी ना मंदिर को अपनाऊं,
फिर भी मैं चर्च-पीर के आगे शीश अक्सर झुकाकर जाऊं,
गीता मुझसे तुम पढ़वाओ, चाहे रामायण का पाठ करालो,
कुरान-बाइबल को भी मैं गीता-रामायण जैसा ही तो पाऊं,
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं, मन की मैं करता ही जाऊं,
तुलसी स्वास्थ्यवर्धक है, इसलिए उसको पूज कर आऊं,
प्रक्रति पर हम निर्भर है, देव उनको मैं इसलिए बताऊँ,
अन्याय के खिलाफ लडो,रामायण-गीता में मैं ये सिखलाऊं,
गलत कुछ भी करने से पहले, मैं उस का डर दिल में पाऊं,
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं, मन की मैं करता ही जाऊं,
होली पर रंगों से खेलूँ और दीवाली दीप जलाऊं,
नवरात्रों में देवी को पूजूं, दशहरे पर रावन को फून्कूं,
फसले आने पर पर लोहणी और बसंत मनाऊं,
ईद-क्रिसमस भी मैं होली और दीवाली बनाऊं,
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं, मन की मैं करता ही जाऊं,
बुरा मुझे बुरा लगे, हिन्दू हो या कोई और हो,
भला मुझे भला लगे, हिन्दू हो या कोई और हो,
हिंदुत्व मुझे यही सिखाता, भले को अपनाकर बुरे से दूर जाऊं,
जीवन अपना इसलिए है की किसी के काम आऊं,
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं, मन की मैं करता ही जाऊं,
गर्व है मुझको हिदुत्व पर जिसने मुझको ये समझाया,
बुरा ना कोई होता,दिल में सबके प्रेम है,
कुछ लोगो की चालें है ये, दिलो में जो ना मेल है,
इन चालों को मिटाता जाऊं, मैं बस प्यार बढाता जाऊं,
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं, मन की मैं करता ही जाऊं,
कोई कहे पचपन करोड़, कोई कहे एक सौ करोड़ देवता है,
चार वेद,अठारह पुराण,एक सौ आठ उपनिषद कुछ स्मृतियां भी हैं,
रामायण, महाभारत,गीता और न जाने कितने है,
वो एक रूप अनेक, अन्याय से लड़ और कर्म कर बस मैं तो ये ही बतलाऊं,
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं, मन की मैं करता ही जाऊं,
धरम के नाम पर मैंने भी बहुत सी रूढियां लिखी है,
सच है ये की कभी मैंने भी लोगो से खिलवाड़ किए,
धरम की ही सीख से मैं आत्मा की सुन पाऊं,
डरूं नहीं, झुकूं नहीं बस सही को ही अपनाऊं,
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं, मन की मैं करता ही जाऊं,
सभ्यता का बड़ा समुन्दर है मुझको ये है समझाने को,
वो है एक रूप अनेक, ना कोई बड़ा और ना कोई है छोटा,
कर्म-धर्म सब यहीं है फलने, किसी को भी चाहे अपनाऊँ,
उसको पूजूं या ना पूजूं, हर जान बस एक इंसान को ही पाऊं,
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं, मन की मैं करता ही जाऊं,
माँ-बाप मेरे हिन्दू है , मैं भी हिन्दू कहलाया,
सब धर्मो का आदर यहाँ, सब को सम्मान मैं दे पाऊं,
धर्म की सीख से ही भगवान् से पहले भी मैं इंसानियत को पूज पाऊं,
आज़ादी है मुझको यहाँ किसी को भी मैं अपनाऊं,
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं मन की मैं करता ही जाऊं,
साम्प्रदायिकता के नाम पर हिन्दू का देखो जो विरोध जताते हैं,
धर्म का मतलब जीवन दर्शन, ये वो समझ न पाते हैं,
जिन लोगो को ज्ञात नहीं खुद के जीने का मतलब,
उनकी बातों को मैं लोगो क्यों अपने दिल से लगाऊं,
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं मन की मैं करता ही जाऊं,
धर्म का अर्थ जीवन दर्शन है, ये कैसे मैं समझाऊं,
रास्ते इनेक मंजिल है एक, ये मैं कैसे दिखलाऊं,
सबकी अपनी कोशिश है उस तक पहुँच पाने की,
सबकी कोशिश को देखो मैं सही रास्ता दिखलाऊं,
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं मन की मैं करता ही जाऊं...........
I liked the thoughts on this post http://hrudyanjali.blogspot.com/2008/10/blog-post_11.html and http://hrudyanjali.blogspot.com/2008/10/blog-post_7859.html
and after that wrote this.
The above picture have been designed by Madhur Kashayap, who is working with me in Freescale. I would like to thank him for let me using this picture for the post.
SACHIN JAIN
Tuesday, October 07, 2008
मुश्किलें जीने का सहारा बन गई.......
मुश्किलें जीने का सहारा बन गई,
जिस दिन जीवन की हकीकत समझ आई मुझे,
सोचा ना तकलीफें आई तो क्या जिन्दगी बिताई ,
ना इम्तहान देने पड़े इस जीवन में तो ,
अपने जीने का मतलब ही क्या रह जाएगा ,
पूरा करने की कोशिश में इन इम्तहानो को ,
कुछ ख्वाब बन ही जाते हैं ,
और अक्सर ख्वाब टूट जाया करते हैं ,
पर क्या ख्वाब टूटने से इंसान भी टूट जाते हैं,
मेरे ख्याल में नहीं …………
ख्वाब टूटने से एक अनुभव जुड़ता हे ,
जोश दुगना करके फिर से ख्वाब पूरा करने की कोशिश करनी पड़ती हे ,
फिर कुछ ख्वाब टूट जाते हैं कुछ पूरे हो जाते हैं ,
यही ख्वाब ही तो जीवन को मकसद देते हैं ,
नहीं तो बिना मकसद ये जीवन किस काम का ,
जब हमे ना ये पता की हम कहाँ से आए हैं ,
और ना ये पता की कहाँ जाना हे ,
जिए जाते हैं हम सब जिए जाते हैं …..
बस शायद इन ख्वाबों को पूरा करने को ,
जिए जाते हैं…………………..
सचिन जैन
जिस दिन जीवन की हकीकत समझ आई मुझे,
सोचा ना तकलीफें आई तो क्या जिन्दगी बिताई ,
ना इम्तहान देने पड़े इस जीवन में तो ,
अपने जीने का मतलब ही क्या रह जाएगा ,
पूरा करने की कोशिश में इन इम्तहानो को ,
कुछ ख्वाब बन ही जाते हैं ,
और अक्सर ख्वाब टूट जाया करते हैं ,
पर क्या ख्वाब टूटने से इंसान भी टूट जाते हैं,
मेरे ख्याल में नहीं …………
ख्वाब टूटने से एक अनुभव जुड़ता हे ,
जोश दुगना करके फिर से ख्वाब पूरा करने की कोशिश करनी पड़ती हे ,
फिर कुछ ख्वाब टूट जाते हैं कुछ पूरे हो जाते हैं ,
यही ख्वाब ही तो जीवन को मकसद देते हैं ,
नहीं तो बिना मकसद ये जीवन किस काम का ,
जब हमे ना ये पता की हम कहाँ से आए हैं ,
और ना ये पता की कहाँ जाना हे ,
जिए जाते हैं हम सब जिए जाते हैं …..
बस शायद इन ख्वाबों को पूरा करने को ,
जिए जाते हैं…………………..
सचिन जैन
Monday, October 06, 2008
जिन्दगी बहुत से इम्तहान लेती है..........
जिन्दगी बहुत से इम्तहान लेती है ,
कई बार तो बिलकुल तोड़ देती है,
सभी ख्वाइशें पल में बिखर जाती हैं,
सभी चाहतें दिल में दबी रह जाती हैं,
कुछ ना कर पाए ऐसे उलझ जाते हैं,
हम इन्सान तो कुछ समझ ना पाते हैं ,
खुद पर यंकी करना और लड़ते रहना ,
हम इंसानों का यही तो हे काम ,
हिम्मत और धेर्य ही तो बनाते जीवन महान ,
इम्तहान तो जीवन के साथ लगे ही रहेंगे,
बिना इनके तो जीवन सूना ही रहेगा ,
हर इम्तहान मुस्कराकर देना है,
हर समय कुछ नया करने की सोचना,
हो जाए तो ठीक वर्ना फिर एक नई तम्मना,
ये तम्म्नाए ही तो जीवन को नया रूप देंगी,
एक अलग पहचान इस जीवन की छोड़ देंगी...........
कई बार तो बिलकुल तोड़ देती है,
सभी ख्वाइशें पल में बिखर जाती हैं,
सभी चाहतें दिल में दबी रह जाती हैं,
कुछ ना कर पाए ऐसे उलझ जाते हैं,
हम इन्सान तो कुछ समझ ना पाते हैं ,
खुद पर यंकी करना और लड़ते रहना ,
हम इंसानों का यही तो हे काम ,
हिम्मत और धेर्य ही तो बनाते जीवन महान ,
इम्तहान तो जीवन के साथ लगे ही रहेंगे,
बिना इनके तो जीवन सूना ही रहेगा ,
हर इम्तहान मुस्कराकर देना है,
हर समय कुछ नया करने की सोचना,
हो जाए तो ठीक वर्ना फिर एक नई तम्मना,
ये तम्म्नाए ही तो जीवन को नया रूप देंगी,
एक अलग पहचान इस जीवन की छोड़ देंगी...........
Sunday, October 05, 2008
समय का बीतना........
समय का बीतना तो एक सत्य है ,
उस पर विचार का कोई औचित्य नहीं है,
विचार तो इस बात पर होना चाहिए कि,
बीते हुए समय ने हमें क्या दिया,
मीठी यादें, सुनहरे सपने,
कुछ ज्ञान, कुछ विज्ञान, अजनबी लोग,
अनुभव,कुछ असफ़लताएं, कुछ सफ़लताएं,
और ऎसा बहुत कुछ जो इस जीवन के लिए जरूरी था.......................
सचिन जैन
उस पर विचार का कोई औचित्य नहीं है,
विचार तो इस बात पर होना चाहिए कि,
बीते हुए समय ने हमें क्या दिया,
मीठी यादें, सुनहरे सपने,
कुछ ज्ञान, कुछ विज्ञान, अजनबी लोग,
अनुभव,कुछ असफ़लताएं, कुछ सफ़लताएं,
और ऎसा बहुत कुछ जो इस जीवन के लिए जरूरी था.......................
सचिन जैन
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