tag:blogger.com,1999:blog-13893588.post5250515004252384296..comments2007-06-03T13:44:31.348-07:00Comments on my writings: गर्व होता था मुझे हिन्दुसतानी होने पर,SACHIN JAINhttp://www.blogger.com/profile/03415152658747911115noreply@blogger.comBlogger2125tag:blogger.com,1999:blog-13893588.post-33103367601651270262007-06-03T13:44:00.000-07:002007-06-03T13:44:00.000-07:00भई बात समझ में नहीं आई । हम अपने आप को शरीक कर बात...भई बात समझ में नहीं आई । हम अपने आप को शरीक कर बात करना कब शुरू करेंगे । हिन्दुस्तान तो वैसा ही बन रहा है जैसा हम बना रहे हैं या कि बनने दे रहे हैं । <BR/><BR/>हमें यदि शर्म आनी है तो इस बात पर आनी चाहिए कि हमने हिन्दुस्तान को ऐसा बना दिया या ऐसा बन जाने दिया ।<BR/><BR/>लेकिन हम अतीत की मरम्मत नहीं कर सकते । जो बीत गया सो बीत गया । उसका क्या रोना-गाना । आज से ही मरम्मत शुरू कर दें । किसी के भरोसे बैठे रह गए तो यह खुद पर शरम आने वाली एक और बात होगी । हम ऐसा कुछ कर लें कि हमारी आने वाली पीढियों को हम पर और अपने आप पर शर्म न आए ।<BR/><BR/>स्वर्ग तो मरने पर ही दीखता है साहेब ।विष्णु बैरागीhttp://www.blogger.com/profile/07004437238267266555noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13893588.post-46104270604578714532007-06-03T01:45:00.000-07:002007-06-03T01:45:00.000-07:00सचिन जी,बहुत सटीक रचना लिखी है।आज कल जो हो रहा है ...सचिन जी,बहुत सटीक रचना लिखी है।आज कल जो हो रहा है वह शर्मसार कर रहा है हम सबको।<BR/><BR/><BR/>कभी था अपना हिन्दुसतान ऎसा जहाँ सब एक थे,<BR/>तब नारा लगता था हिन्दु मुस्लिम सिख ईसाई आपस में है भाई-भाई का,<BR/>जब होता था ऎसा, तब गर्व होता था मुझे,<BR/>जाने क्यूँ हुआ ऎसा अब शर्म आती है मुझे हिन्दुस्तानी होने पर,परमजीत बालीhttp://www.blogger.com/profile/01811121663402170102noreply@blogger.com